अक्टूबर 31, 2014 11:34:41 तक के समाचार

रिपोर्टर लाग इन

 प्रदेशजिलातहसीलगाँव

आरोप सिद्ध हुए तो संन्यास ले लूंगा !

नई दिल्ली। गृह मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों अपने एक वरिष्ठ सहयोगी मंत्री से काफी नाराज हैं। सिंह का कहना है कि मंत्री उनके बेटे पंकज सिंह के खिलाफ झूठी बातें फैला रहे हैं। गृहमंत्री ने इस मामले को बीजेपी और आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व के सामने उठाया है। राजनाथ ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी बात की है। राजनाथ ने इन आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहाकि उनके परिवार के खिलाफ अफवाहें फैलाई जा रही है। आरोप सिद्ध होते हैं तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। राजनाथ ने कहाकि ऎसी बातों पर पीएम मोदी ने भी हैरानी जताई।वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ऎसी बातों को खारिज किया और इन्हें बेबुनियाद बताया। पीएमओ के अनुसार यह सरकार की छवि खराब करने का प्रयास है।  इस संबंध में एक अंग्रे

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ABP News

RUN FOR UNITY: 15 हजार लोगों के साथ दौड़ में शामिल हुए मोदी, दिलाई एकता की शपथ
दैनिक भास्कर
नई दिल्ली. सरदार बल्लभभाई पटेल की 139वीं जयंती के मौके पर शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने यहां झंडा दिखाकर 'रन फॉर यूनिटी' दौड़ की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में शामिल होने करीब 15 हजार लोग पहुंचे। पीएम नरेंद्र मोदी भी इस दौड़ में शामिल हुए। राजधानी के विजय चौक से इंडिया गेट तक होने वाली इस रैली में शामिल होने वाले लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती गई, जिसके बाद पीएम के सुरक्षाकर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान लोगों ने पीएम से हाथ मिलाया और बातचीत भी की। इससे पहले, पीएम दिल्ली के पटेल चौक पहुंचे और सरदार पटेल की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी।
PM ने दिखाई 'रन फॉर यूनिटी को हरी झंडी, खुद भी दौड़ में शामिल हुए मोदीZee News हिन्दी
LIVE: पीएम ने दिखाई 'रन फॉर यूनिटी को हरी झंडी, खुद भी दौड़ में शामिल हुए मोदीआज तक
सरदार पटेल के बिना अधूरे थे गांधी, रन फॉर यूनिटी समारोह में बोले मोदीLive हिन्दुस्तान
ABP News -दैनिक जागरण -Oneindia Hindi
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Zee News हिन्दी

महाराष्ट्र में बीजेपी की पहली सरकार: देवेंद्र फड़नवीस आज लेंगे मुख्‍यमंत्री पद की शपथ, समारोह में नहीं जाएगी शिवसेना
Zee News हिन्दी
मुंबई : महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व में बीजेपी की पहली सरकार शुक्रवार को यहां आयोजित एक भव्‍य समारोह में शपथ लेगी। वहीं, महाराष्ट्र में आज होने जा रहे फड़नवीस के मुख्यमंत्री पद के शपथग्रहण समारोह में शिवसेना शामिल नहीं होगी। शिवसेना ने कहा कि एक संभावित गठबंधन के लिए बातचीत होने के दावों के बावजूद 'लगातार अपमानित करने' के चलते वह इस समारोह का बहिष्कार करेगी। गौर हो कि फड़नवीस महाराष्ट्र के 27वें और प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में आज यहां एक भव्य समारोह में शपथ लेंगे ।44 साल के फड़नवीस नागपुर से विधायक चुने गए हैं। वानखेड़े स्टेडियम में ...
फड़नवीस आज लेंगे शपथ, शिवसेना करेगी बहिष्कारLive हिन्दुस्तान
महाराष्ट्र के भावी सीएम देवेंद्र फडणवीस के शपथ में नहीं जाएगी शिवसेना लेकिन 'सामना' में दी शुभकामनाABP News
महाराष्ट्र : देवेंद्र फडणवीस का शपथ ग्रहण आज, शिवसेना नहीं होगी मंच परएनडीटीवी खबर
दैनिक जागरण -प्रभात खबर -Sanjeevni Today
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आईबीएन-7

स्वच्छ भारत अभियान पर चला झाड़ू
नवभारत टाइम्स
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश से गंदगी को दूर करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया है। उनके एक आह्वान पर आम लोग क्या वीआईपी तक झाड़ू उठा देश से गंदगी को साफ करने में जुटे हैं। वहीं दूसरी तरफ गुरुवार को छठ पूजा करने घाटों पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस अभियान पर ही झाड़ू चला दिया। जिन घाटों को पूजा से पहले अच्छी तरह साफ किया गया था, पूजा के बाद वहां गंदगी का आलम देखने लायक था। श्रद्धालु घाटों के आस-पास फूल माला, पूजा का सामान, पॉलीथिन बैग से लेकर गंदे कपड़े तक छोड़कर चले गए। अपना कॉमेंट लिखें ...
अमिताभ ने भी लिया चैलेंज, लगाई झाड़ूआईबीएन-7
स्वच्छता अभियान : अमिताभ ने भी लगाई झाडूRajasthan Patrika
अभिताभ ने भी लिया स्वच्छ अभियान में हिस्साNai Dunia
aapkisaheli.com -पंजाब केसरी
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ज़नाब एक नज़र इधर भी...

  • फिर लहराया गणित के क्षेत्र मेँ भारत का झंडा |

    भारतीय मूल के दो प्रोफेसरों को गणित के क्षेत्र में ग्लोबल पुरस्कार दिया गया है। इनमें से एक को फील्ड मेडल दिया गया है जिसे ‘गणित के नोबेल पुरस्कार’ के रूप में जाना जाता है। सियोल में आयोजित इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ मैथेमेटिक्स में इंटरनेशनल मैथमेटिकल यूनियन (आईएमयू) ने मंजुल भार्गव को फील्ड मेडल और सुभाष खोट को रॉल्फ नेवानलिन्ना पुरस्कार से नवाजा है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर भार्गव उन चार विजेताओं में से थे जिन्हें प्रत्येक चार में प्रदान किए जाने वाले इस फील्ड मेडल के लिए चुना गया है। भार्गव को फील्ड मेडल ज्यामितिय संख्या में नई पद्धति को विकसित करने के लिए दिया गया है, जबकि खोट को नेवानलिन्ना पुरस्कार यूनिक गेम्स की समस्याओं को परिभाषित करने, इसकी जटिलताओं..

  • सिर झुकाना नहीं आता

    इतनी मुश्किलें हैं फिर भी उसकी महफ़िल में जाकर मुझको गिडगिडाना नहीं भाता…   वो जो चापलूसों से घिरे रहता है वो जो नित नए रंग-रूप धरता है वो जो सिर्फ हुक्म दिया करता है वो जो यातनाएँ दे के हँसता है मैंने चुन ली हैं सजा की राहें क्योंकि मुझको हर इक चौखट पे सर झुकाना नहीं आता…       उसके दरबार में रौनक रहती उसके चारों तरफ सिपाही हैं हर कोई उसकी इक नज़र का मुरीद उसके नज़दीक पहुँचने के लिए हर तरफ होड मची रहती है और हम दूर दूर रहते हैं लोगों को आगाह किया करते हैं क्या करें, इतनी ठोकरें खाकर भी मुझको दुनियादारी निभाना नहीं आता…   अनवर सुहैल..

  • कुछ यादे (बिछडे लम्हों की )

    वो बचपन ..वो नादानिया वो शरारते ..वो मनमानिया "वो गावं ..वो गलियारे वो आँगन ..वो चोबारे .... जहाँ रिस्तो की ऊँगली पकड़कर मैंने ख़ुद को पहली बार नन्हे कदमो पर चलते देखा था रिस्तो का वो एक मेला था जहाँ हर एक कंधे पर मने ख़ुद को झूलते देखा था " सरकार की नोकरी ने घर की जरूरतों ने पापा को विदेश का रास्ता दिखाया था॥ ६साल की थी जब ,नम आँखों से उस प्लेन को उड़ान भरते देखा था 'भीगी भीगी पलकों से .. माँ को चिट्ठियाँ पढ़ते देखा था टूटी फूटी सब्द रचना से ख़ुद को चिट्ठिया लिखते देखा था " खेतो के बीच से निकली उस पगडण्डी पर मैंने ख़ुद को स्कूल जाते देखा था नन्हे नन्हे कदमो से जब नदिया के पुल से उतरती थी तो ख़ुद को नदिया की गहरायी के डर से उबरते देखा था बढ़ते कद के साथ.. अपनी मासूमियत को शातानियो में बदलते देखा था " ख़..

  • नेता और भगवान |

    नेता को जनता चुनती है भगावान को भक्त ठीक है, नेता जनता के बीच से निकलते है भगवान संतो के बीच से, नेता भी  जनता से अछ्छी तरह परिचित होते भगवान भी भक्तो से  यह भी ठीक है|  लेकिन अंतर कहाँ है देखते है ? भगवान भक्त के प्रेम को देखते  है, नेता जी दौलत को देखते है | भगवान सबको गले लगते है नेता जी अपने फायदे के हिसाब से | भगवान भक्त से मिलने के लिये खुद आते है , नेता जी के यहाँ अर्जी देनी पडती है | भगवान भक्तो के दिल मे बसते है नेता जी जाति, सम्प्रदाय, मे बसते है भगवान भक्तो का भला चाहते है , नेता जी अपना | भगवान देते है नेता जी लेते है | भगवान भक्त के आगे झुकते है, नेता जि झुकाते है | भगवान जाति पात, अमीर गरीब,मे भेद नही करते, नेता जी ...............? हम(आत्मा) भगवान ( परमात्मा) दोनो एक ही है कोयी भेद नही है|   जब तक नेता ..

  • विजयी के सदृश जियो रे - रामधारी सिंह दिनकर

    वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो चट्टानों की छाती से दूध निकालो है रुकी जहाँ भी धार शिलाएं तोड़ो पीयूष चन्द्रमाओं का पकड़ निचोड़ो   चढ़ तुंग शैल शिखरों पर सोम पियो रे योगियों नहीं विजयी के सदृश जियो रे   जब कुपित काल धीरता त्याग जलता है चिनगी बन फूलों का पराग जलता है सौन्दर्य बोध बन नयी आग जलता है ऊँचा उठकर कामार्त्त राग जलता है   अम्बर पर अपनी विभा प्रबुद्ध करो रे गरजे कृशानु तब कंचन शुद्ध करो रे   जिनकी बाँहें बलमयी ललाट अरुण है भामिनी वही तरुणी नर वही तरुण है है वही प्रेम जिसकी तरंग उच्छल है वारुणी धार में मिश्रित जहाँ गरल है   उद्दाम प्रीति बलिदान बीज बोती है तलवार प्रेम से और तेज होती है   छोड़ो मत अपनी आन, सीस कट जाये मत झुको अनय पर भले व्योम फट जाये दो बार नहीं यमराज कण..

  • भ्रष्टाचार तभी मिट सकता है जब हमारे और आपके अंदर से आवाज उठनी चाहिये कि हम क्या है |

     हम या आप कुछ कर सकते तो ईतना ही कि एक ग्वाला दूध मे  मिलावट करने से पहले ए सोचे कि ऐ  नौजवान होने वाले  बच्चे हमारे देश के भविश्य है जिसे  मै  मिलावट वला दूध पिला रहा हू , एक शिक्षक ऐ सोचे कि हम हमे इन बच्चो  को शिक्षा देनी ही हमारी प्रथिमकता है ऐ हमारे देश के भविशय है , हम ऐ सोचे कि हमारे घर मे 5 वाट के बल्ब से भी रोशनी हो सकती है , हो सकता है कि  10-20 वर्ष मे ईमांदारी  कि जडे पकड ले या शुरुआत हो जाये |  जब हम अभी से अपने अंदर कि कमियो को अगली पीढी मे नही आने के लिये  उत्प्रेरित करगे, तो लगेगा कि सही रूप मे भ्रस्टाचार के खिलाफ खडे हो गये है | विचार बहुत ही बुनियादी है , लेकिन सहमति नही बनती है ,हमारे 3 -10 लगो के विचार मिल सकते है ,  शिर्फ  विचार ही मिल रहे रहे ना तो मै कायाम हू ना तो आप कायम है (हो ..

  • कोयी चांद पर कविता तभी लिख सकता है जब उसका पेट भरा हो , भुखे आदमी को चांद भी रोटी नजर आती है

    यह पहले भी कह चुका हू अब भी कह रहा हू| आज तक  चैनेल ने ' ऑपरेशन आम आदमी' के जरिए जो खुलासा हुआ है कि कैसे जारी है भ्रष्टाचार| आप किसी भी शहर या प्रदेश से जुडे हो , आप अछ्छी तरह देख रहे होगे सुन रहे होगे , कि  कैम्प लगा है आज आप किसी भी पार्टी की सदस्यता लिजिये, चाहे कोयी भी पार्टी हो  कोयी मानक नही है,  लगता है जैसे संख्या बढानी हो इस जनपद मे, ईतने लोगो ने, इस जनपद मे इतने लोगो ने , सदस्यता ग्रहण की| कौन जुड रहा है, चोर है , ईमांदार है, भ्रश्ट है, कोयी  मानक नही है ना ही मतलब है, कौन लोग जुडने कि कोशिश मे लगे है हम आप अछ्छी तरह जानते है, क्यो कि हमे आप को लगता है कि  फलाँ पार्टी का भविश्य अछ्छा है अभी से जुड जायेगे तो  तो हो सकता है कि आगे चल कर विधायक आदि बन जाये , या प्रशासन के  उपर धौश जमा कर अपना काम ..

  • कविता: नए साल की शुभकामनाएँ!

    1. खेतों को नाज मिले बैलों को सानी जंगल को पेड़ मिलें नदिया को पानी     बिटिया को प्‍यार मिले बेटे को काज तवे को रोटी मिले चूल्‍हे को आग   बटिया को राही मिले प्‍यासे को कुवाँ बच्‍चों को खेल मिले चिमनी को धुवाँ   जुगनू को रा‍त मिले चिडि़या को आसमान ‘होरी’ को मान मिले संघर्ष को दास्‍तान   सागर भी नीला रहे पर्वत हो धानी ऐसा हो नया साल सपनों के मानी लेखक कमल जोशी          2. नये साल की शुभकामनाएँ! खेतों की मेड़ों पर धूल-भरे पाँव को, कुहरे में लिपटे उस छोटे-से गाँव को, नए साल की शुभकामनाएँ!   जाते के गीतों को, बैलों की चाल को, करघे को, कोल्हू को, मछुओं के जाल को, नए साल की शुभकामनाएँ!   इस पकती रोटी को, बच्चों के शोर को, चौंके की गुनगुन को, चूल्हे की भोर को, नए साल की शुभकामनाएँ! &n..

  • तुम अपनी हो, जग अपना है

    तुम अपनी हो, जग अपना है किसका किस पर अधिकार प्रिये फिर दुविधा का क्या काम यहाँ इस पार या कि उस पार प्रिये । देखो वियोग की शिशिर रात आँसू का हिमजल छोड़ चली ज्योत्स्ना की वह ठण्डी उसाँस दिन का रक्तांचल छोड़ चली । चलना है सबको छोड़ यहाँ अपने सुख-दुख का भार प्रिये, करना है कर लो आज उसे कल पर किसका अधिकार प्रिये । है आज शीत से झुलस रहे ये कोमल अरुण कपोल प्रिये अभिलाषा की मादकता से कर लो निज छवि का मोल प्रिये । इस लेन-देन की दुनिया में निज को देकर सुख को ले लो, तुम एक खिलौना बनो स्वयं फिर जी भर कर सुख से खेलो । पल-भर जीवन, फिर सूनापन पल-भर तो लो हँस-बोल प्रिये कर लो निज प्यासे अधरों से प्यासे अधरों का मोल प्रिये । सिहरा तन, सिहरा व्याकुल मन, सिहरा मानस का गान प्रिये मेरे अस्थिर जग को दे दो तुम प्राणों क..

  • यह पल-भर का उन्माद प्रिये।

    बस इतना--अब चलना होगा फिर अपनी-अपनी राह हमें । कल ले आई थी खींच, आज ले चली खींचकर चाह हमें तुम जान न पाईं मुझे, और तुम मेरे लिए पहेली थीं; पर इसका दुख क्या? मिल न सकी प्रिय जब अपनी ही थाह हमें । तुम मुझे भिखारी समझें थीं, मैंने समझा अधिकार मुझे तुम आत्म-समर्पण से सिहरीं, था बना वही तो प्यार मुझे । तुम लोक-लाज की चेरी थीं, मैं अपना ही दीवाना था ले चलीं पराजय तुम हँसकर, दे चलीं विजय का भार मुझे । सुख से वंचित कर गया सुमुखि, वह अपना ही अभिमान तुम्हें अभिशाप बन गया अपना ही अपनी ममता का ज्ञान तुम्हें तुम बुरा न मानो, सच कह दूँ, तुम समझ न पाईं जीवन को जन-रव के स्वर में भूल गया अपने प्राणों का गान तुम्हें । था प्रेम किया हमने-तुमने इतना कर लेना याद प्रिये, बस फिर कर देना वहीं क्षमा यह पल-भर का उन्माद प्रिये। ..

  • नारी जीवन और उसकी पिडा

    आज के इस दौर मे नारी जीवन महज एक समझौते पर निर्धारित हो गया है समाज मेँ नारी का अस्तित्व मजाक बन कर रह गया है, समाज के वर्तमान पेरिवेश मे नारी को हर जगह सहना पड रहा है या समझौता करना पड रहा है,  क्या एक पुरुष इस पीडा का अनुमान लगा सकता है, जो एक नारी सहती  चली आ रही है |   पुरुष तो उस पीडा की कल्पना भी नही कर सकता है, समाज से जैसे इंसानियत समाप्ति की तरफ बढ रही है , और हर तरफ भ्रष्टाचार , बहिस्कार, बलात्कार फैलता जा रहा है हर तरफ शिकरी शिकार ढुढने लगा है , कौन भेडिया  किस रुप मे घूम रहा है समझना मुस्किल है , हैवानियत इतनी बढ गयी है कि अपने खून के रिश्ते भी शर्मसार हो रहे है | इस तरह के लोग समझ नही पा रहे है , नारी शक्ति स्वरुप है , जिसके बल पर यह संस्सर कायम है |     यह नारी किससे कहे कहाँ फरियाद करे , इ..

  • श्री रामकृष्ण परमहंस - तर्क से धर्म प्राप्त नहीं हो सकता।

    श्री रामकृष्ण परमहंस से मिलने नित्य बहुत सारे लोग आते थे,वे उनसे तरह तरह के तर्क करते रहते थे,रामकृष्ण सभी के तर्को का जवाब खुशी खुशी देते थे।एकबार केशवचन्द्र नामक बहुत बड़े विद्वान तार्किक उनके पास तर्क करने पहुँचे,केशवचन्द्र रामकृष्ण को अपने तर्को से हराना चाहते थे।रामकृष्ण तो पढ़े लिखे नहीं थे,परन्तु वे सिद्ध पुरुष थे,परन्तु केशवचन्द्र के नजर में वे गंवार थे।उस दिन काफी चर्चा से बहुत भीड़ जुट गई,सबलोग सोच रहे थे कि रामकृष्ण अवश्य हार जायेंगे कारण उस सदी के सबसे बड़े विद्वान,तार्किक जो पधारे थे।केशवचन्द्र ईश्वर के खिलाफ तर्क देने लगे,रामकृष्ण विरोध नहीं करके उनकी प्रशंसा करने लगे,क्या दलील दी आपने।केशवचन्द्र सोच रहा था कि रामकृष्ण मेरे तर्को को गलत कहेगा तभी तो तर्क विवाद बढ..

  • हिंदू विवाह के सात फेरे और सात वचन

    विवाह = वि + वाह, अत: इसका शाब्दिक अर्थ है - उत्तरदायित्व का वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और पत्नी के बीच एक प्रकार का बंधन होता है जिसे कि विशेष परिस्थितियों में तोड़ा भी जा सकता है, परंतु हिंदू विवाह पति और पत्नी के बीच कयी जन्मो का सम्बंध होता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता। अग्नि के सात फेरे लेकर और कयी चोजो को साक्षी मान एक पवित्र बंधन होता हैं। हिंदू विवाह में मे इस संम्बंध को अत्यंत पवित्र माना गया है। सात फेरों और सात वचन विवाह के बाद कन्या वर के वाम अंग में बैठने से पूर्व उससे सात वचन लेती है। कन्या द्वारा वर से लिए जाने वाले सात वचन इस प्रकार है। वचन 1 तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञक..

  • चिठ्ठी आई है ( प्रताप सोमवंशी)

    भइया की चिठ्ठी आई है घर भर की बातें लाई है पहले लिखा तुम्हे प्यार है और आगे भाभी बीमार है छुटकी को अक्सर बुखार है लिखी अम्मा की पुकार है   आंखे जैसी की तैसी है, गठिया की हालत वैसी है अब तो बेटे है ये लगता, मौत ही जैसे अंतिम हल है शेष कुशल है       घर में पैसे चार नहीं है मिलता कही उधार नहीं है भाई जबसे दिन बिगड़े हैं, कोई नातेदार नही है। छोटे का तुम हाल न पूछो मोटी कितनी खाल न पूछो अरजी आज नई दे आया, और अगला इंटरव्यू कल है शेष कुशल है   बहना का संदेश आया है, उसने फिर ये कहलाया है। सामान और नगदी की खातिर, सास-ससुर ने धमकाया है। कुछ न कुछ सहते रहते हैं, ऐसे दिन कटते रहते हैं। ये सब छोड़ो अपनी लिखना, बीत रहे कैसे छिन-पल हैं। शेष कुशल है।   बप्पा खुद से जूझ रहे हैं, कब आओगे पूछ रहे हैं। लिख दो ख्याल र..

  • संपादकीय : प्रजातन्त्र कैसे हो सकता है अपने मूल रुप मे फलीभूत |

    सविंधान मे राजनितिक दल नाम की कोयी चीज नही है| सरकार बनाने के लिये सदन का बहुमत हासिल होने की शर्त रखी गयी है | समूह बनाने का मौलिक अधिकार  सविधान मे दिया गया है, इसी समूह बनाने की आजादी के मौलिक अधिकार की भावना के तहत लोक प्रतिनिधि अधिनियम 1951 सँसद  मे बनाया गया | इसी नियम के तहत राजनितिक दलो का वजूद आया और उनकी पंजीकरण की व्यवस्था की गयी | राजनितिक दलो की सदस्यता देश के सभी नाग्रिको के लिये मुक्त रखी गई है | इसी प्रविधान का सहारा लेकर किसी भी राजनितिक दल का अध्यकक्ष अपने सगे सम्बधियो को अपने ही राजनितिक दल मे सामिल कर लेता है और पार्टी को राजतन्त्र  की उत्तराधिकारी वाली व्यस्था मे परिवर्तित कर देता है, इस प्रकार प्रजातन्त्र की मूल भावना की हत्या हो जाती है | कितना अच्छा होता कि लोकप्रति..

  • चाहे हिन्दू बनो तुम चाहे मुसलमान बनो

    1. चाहे हिन्दू बनो तुम चाहे मुसलमान बनो चाहे गीता पढ़ो या आमिले कुरान बनो चाहे ईसाई बनो या के सिख बन जाओ हर मजहब कहता है पहले मगर इंसान बनो         2. तड़पते दिल की सदाएँ सुनो करो कोशिश बेकरारों को सुकूनो करार दे जाओ जो भी आया है वो जाने के लिए आया है आदमी हो तो आदमी को प्यार दे जाओ 3. आँख हिन्दू है मेरी दिल है मुसलमान मेरा बताओ दफ़्न करोगे के तुम जलाओगे और इसी बात पे दोनों ही अगर झगडे तो मेरी मिट्टी को ठिकाने कहाँ लगाओगे? 4. राम दिल्ली में तो मुंबई में बिक गई सीता कृष्ण मथुरा में तो काशी में बिक गई गीता चलन इस दौर का कैसा ये हो गया लोगो आज हर दिल लगे है प्यार से रीता-रीता 5. टूट जाती है साँस जब तेरी लोग उल्फ़त का सिला देते हैं खाक पर खाक डाल कर तेरी खाक में खाक मिला देते हैं 6. दोस्तों को दिल दुखाना ..

  • गौतम बुद्ध- वैग्यानिक पहलू (Indusial Identity Born Due To Pre conception of Mind)

    गौतम बुद्ध ने देखा कि वह पिपल का पत्ता जिसके निचे वे बैठ कर तपस्यारत थे ओ पत्ता और उनका शरीर एक समान है | इसमे से किसी का न प्रिथक अस्तितव (separate existence ) है न वह अस्तित्व स्थाई है (or not stable ) समस्त संस्सारिक प्रपंचो का परस्परअल्म्बन (Dependent To Each Other) देखकर बुद्ध ने समस्त प्राणियो की खोखली प्रक्रित (Nature) को समझ लिया था कि सब प्रिथक और सव्तंत्र अस्तित्व से रहित है | उनको इस सत्य का साक्षात्कार हुआ कि मुक्ति के कुंजी परस्पर अवल्मबन था अनात्म के सिद्धोन्तो मे ही निहित है | अपने शरीर , भावनाओ , अवधारणाओ , मानशिक भाव बोध और चेतना की नदियो के प्रकाश की अनुभुती से बुद्ध समझ गये थे कि जीवन के परम आश्यक तत्व है- अनित्यता था अन्नात्म | यदि ये न हो तो न तो कुछ अस्तित्वान हो और न उसका विकाश हो | यदि धान ( Tree Of Rice ) अनित्य एवँ अनात्म भा..

  • हिंदू धर्म क्या कहता है ?

    हिंदू धर्म क्या कहता है ?   हिंदू धर्म मे इन चार की  चर्चा की गयी है चार वर्ण-  क्षत्रिय, ब्राहम्ण, वैश्य, सुद्र चार आश्रम – ब्रम्ह्चर्य, ग्रिहस्त, वामप्रस्थ , स्नयास चार पुरसार्थ – धन , धर्म , काम, मोक्ष.   चार वर्ण -पहले वर्ण कर्म के अनुसार निर्धारित होता था आज के समय मे आनुवंशिक हो गया है, राजा का लडका  राजा होगा मुख्य मंत्री का लडका मुख्य मंत्री होगा , विधायक का लडका विधायक होगा, सांसद का लडका सांसद होगा,  कोशिश यही रहती है |   चार आश्रम -पहले  यह निर्धारित था और आज के के समय मे आश्रम का कोयी क्रम निर्धारित नही है इनमे से (ब्रम्ह्चर्य, ग्रिहस्त, वामप्रस्थ , स्नयास)     चार पुरसार्थ- (धन , धर्म , काम, मोक्ष) – आज के समय मे धन और काम ही पुरसार्थ मे बचा है धर्म और मोक्ष विलुप्त हो गया ह..

  • नामुमकिन को मुमकिन करने निकले हैं

    नामुमकिन को मुमकिन करने निकले हैं, हम छलनी में पानी भरने निकले हैं। आँसू पोंछ न पाए अपनी आँखों के और जगत की पीड़ा हरने निकले हैं। पानी बरस रहा है जंगल गीला है, हम ऐसे मौसम में मरने निकले हैं। होंठो पर तो कर पाए साकार नहीं, चित्रों पर मुस्कानें धरने निकले हैं। पाँव पड़े न जिन पर अब तक सावन के ऐसी चट्टानों से झरने निकले हैं।   जिंदगी को जुबान दे देंगे    जिंदगी को जुबान दे देंगे धडकनों की कमान दे देंगे हम तो मालिक हैं अपनी मर्ज़ी के जी में आया तो जान दे देंगे रखते हैं वो असर दुआओं में हौसले को उड़ान दे देंगे जो है सहमी पड़ी समंदर में उस लहर को उफान दे देंगे जिनको ज़र्रा नही मयस्सर है उनको पूरा जहान दे देंगे करके मस्जिद में आरती-पूजा मंदिरों से अजान दे देंगे मौत आती 'किरण' है आ जाए तेर..

  • दोस्ती किस तरह निभाते हैं (कविता किरण)

    दोस्ती किस तरह निभाते हैं, मेरे दुश्मन मुझे सिखाते हैं। नापना चाहते हैं दरिया को, वो जो बरसात में नहाते हैं। ख़ुद से नज़रें मिला नही पाते, वो मुझे जब भी आजमाते हैं। ज़िन्दगी क्या डराएगी उनको, मौत का जश्न जो मनाते हैं। ख़्वाब भूले हैं रास्ता दिन में, रात जाने कहाँ बिताते हैं।  ..

  • मगर बजती रही फिर भी कोई झनकार चुटकी में ( पूर्णिमा वर्मन)

    कभी इन्कार चुटकी में, कभी इक़रार चुटकी में कभी सर्दी ,कभी गर्मी, कभी बौछार चुटकी में ख़ुदाया कौन-से बाटों से मुझको तौलता है तू कभी तोला, कभी माशा, कभी संसार चुटकी में कभी ऊपर ,कभी नीचे ,कभी गोते लगाता-सा अजब बाज़ार के हालात हैं लाचार चुटकी में ख़बर इतनी न थी संगीन अपने होश उड़ जाते लगाई आग ठंडा हो गया अख़बार चुटकी में न चूड़ी है, न कंगन है, न पायल है ,न हैं घुँघरू मगर बजती रही फिर भी कोई झनकार चुटकी में  ..

  • जब तक आम आवाम नही सुधरेगी , देश सुधर ही नही सकता

    कयी पहलुओ पर ध्यान देना होगा, पहले हम  सोचते है सरकारी मुलाजि के बारे मे जिससे व्यस्था संचालित होती है ( जिला अधिकारी से लेकर  फोर्थ क्लास  तक ) – चाहे आप विकलांग हो, चाहे आप पिछडे वर्ग से हो , चाहे आप किसी वर्ग से समबंधित हो , सरकार  कि किसी  भी स्कीम का लाभ लेना चाहते हो , उसका लाभ लेने के लिये आप को लोहे के चने चबाने पडí..

  • जाने किसकी राह देखतीं, आस भरी बूढ़ी आँखें ( वर्षा सिंह)

    जाने किसकी राह देखतीं, आस भरी बूढ़ी आँखें । इंतज़ार की पीड़ा सहतीं, रात जगी बूढ़ी आँखें । दुनिया का दस्तूर निराला, स्वारथ के सब मीत यहाँ फ़र्क नहीं कर पातीं कुछ भी, नेह पगी बूढ़ी आँखें । आते हैं दिन याद पुराने, अच्छे-बुरे, खरे-खोटे, यादों में डूबी-उतरातीं, बंद-खुली बूढ़ी आँखें । मंचित होतीं युवा पटल पर, विस्मयकारी घ..

  • बेहतर दुनिया (नवनीत शर्मा)

    बेहतर दुनिया, अच्‍छी बातें, पागल शायर ढूंढ़ रहे हैं ज़हरीली बस्‍ती में यारो, हम अमृतसर ढूंढ़ रहे हैं   ख़ालिस उल्‍फ़त,प्‍यार- महब्‍बत, ख़्वाब यक़ीं के हैं आंखों में  दिल हज़रत के भी क्‍या कहने ! बीता मंज़र ढूंढ़ रहे हैं   सीख ही लेंगे साबुत रहना अपनी आग में जल कर भी हम  दर्द को किसने देखा पहले तो अपना सर ढूंढ रहे हैं ..

  • मुल्क तेरी बर्बादी के

    मुल्क तेरी बर्बादी के आसार नज़र आते है , चोरों के संग पहरेदार नज़र आते है   ये अंधेरा कैसे मिटे , तू ही बता ऐ आसमाँ , रोशनी के दुश्मन चौकीदार नज़र आते है   हर गली में, हर सड़क पे ,मौन पड़ी है ज़िंदगी , हर जगह मरघट से हालात नज़र आते है   सुनता है आज कौन द्रौपदी की चीख़ को , हर जगह दुस्सासन सिपहसालार नज़र आते है   सत्ता से समझ&#..

  • चल मन, उठ अब तैयारी कर

    चल मन, उठ अब तैयारी कर यह चला - चली की वेला है । कुछ कच्ची - कुछ पक्की तिथियाँ कुछ खट्टी - मीठी स्मृतियाँ स्पष्ट दीखते कुछ चेहरे कुछ धुँधली होती आकृतियाँ है भीड़ बहुत आगे - पीछे, तू, फिर भी आज अकेला है । माँ की वो थपकी थी न्यारी नन्ही बिटिया की किलकारी छोटे बेटे की नादानी, एक घर में थी दुनिया सारी चल इन सबसे अब दूर निकल, दुन..

  • पेन्सिल की कहानी !

    एक बालक अपनी दादी मां को एक पत्र लिखते हुए देख रहा था। अचानक उसने अपनी दादी मां से पूंछा, " दादी मां !" क्या आप मेरी शरारतों के बारे में लिख रही हैं ? आप मेरे बारे में लिख रही हैं, ना " यह सुनकर उसकी दादी माँ रुकीं और बोलीं , " बेटा मैं लिख तो तुम्हारे बारे में ही रही हूँ, लेकिन जो शब्द मैं यहाँ लिख रही हूँ उनसे भी अधिक महत्व इस &..

  • मेहदी हसन साहब की एक उम्दा गज़ल

    तेरी आँखो को जब देखा  कँवल कहने को जी चाहा  मैं शायर तो नहीं लेकिन  गज़ल कहने को जी चाहा तेरा नाजुक बदन छूकर  हवाएं गीत गाती है  बहारें देखकर तुझको  नया जादू जगाती है  तेरे होठों को कलियों का  बदल कहने को जी चाहा मैं शायर तो नहीं लेकिन  गज़ल कहने को जी चाहा इजाजत हो तो आँखो में  छुपा लूं, ये हंसी जलवा  तेरे रुख़साë..

  • महान क्रन्तिकारी-अशफाक: एक पत्र देशवासियों के नाम !

    मेरे प्यारे देशवासियों, भारत माता को आजाद करवाने के लिए रंगमंच पर हम सभी भूमिका अदा कर चुके है | गलत किया या सही, हमने जो भी किया, स्वंतत्रता पाने की भावना से प्रेरित होकर किया | हमारे अपने निंदा करे या प्रंशसा, लेकिन हमारे दुश्मनों तक को हमारी हिम्मत और वीरता की प्रंशसा करनी पड़ी है | कुछ लोग कहते है की हमने गुलामी ..

  • स्वामी विवेकानंद जी का विश्व प्रसिद्ध भाषण

    स्वामी विवेकानंद जी का विश्व प्रसिद्ध भाषण, विश्व धर्म महासभा में जिसने पुरे विश्व के जन मानश को झकझोर दिया था |  मेरे अमरीकी भाइयो और बहनों!  आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया हैं उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा हैं। संसार में &#..

  • मन के हारे हार है मन के जीते जीत !

    दोस्तों , बहुत दिनों से आप अपने आपको थका हुआ और कमजोर महसूस कर रहे हैं ! मन में भी नकारात्मक भाव आ रहे हैं ,कोई उमंग महसूस नहीं हो रही है ! जिंदगी बोझिल सी हो रही है ! ऐसे में आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं ! वो आपकी पूरी जांच करने के बाद गंभीर स्वर में आपसे कहता है ,--'माफ़ कीजिएगा ! लेकिन आपकी reports देख कर मुझे लगता है की अगले एक सा&#..

  • हम और आप (स्म्मान और आत्म्समान )

    हम पैदा होते है धीरे धीरे बडे होते है स्कूल जाने लगते है क, ख, ग ( A, B, C, ) सिखना चालू करते है, थोडा और बडे होते है , क से कबूतर , ख से खरगोश , ग से गमला और ( A for Apple , B for Bat, C for Cat ) सीख लेते है , फिर बहूत कुछ सिखते है , पास होते है फेल होते है, कोयी I.A.S . बनता है कोयी P.C.S. बनता है कोयी बाबू बनता है , कोयी चपरासी बनता है , कोयी नेता बनता है कोयी कार्यकर्ता बनता है |  फिर ..


प्रभात खबर

नहीं रहे कथाकार रॉबिन शॉ पुष्प
प्रभात खबर
पटना: मशहूर कथा, नाटक और पटकथा लेखक रॉबिन शॉ पुष्प नहीं रहे. गुरुवार को उनका निधन हो गया. वह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. रॉबिन शॉ पुष्प का जन्म मुंगेर में 20 दिसंबर, 1936 को हुआ था. उनकी पहली कहानी धर्मयुग में छपी थी. रेडियो और टीवी के लिए भी उन्होंने कई नाटक, कहानियां लिखी थीं. उनकी कहानियों पर बनी टीवी फिल्में रांची, मुजफ्फरपुर, रायपुर और दिल्ली दूरदर्शन पर कई बार प्रसारित हो चुकी हैं. पटना से प्रकाशित फिल्म पत्रिका 'चित्र साधना' और 'महादेश' से भी वह लंबे अरसे तक जुड़े रहे थे. उनकी कहानियां ऊदरू, बांग्ला, पंजाबी, मलयालम, गुजराती, मराठी और मैथिली में भी अनुवादित ...
साहित्यकार रॉबिन शॉ पुष्प का निधनLive हिन्दुस्तान

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राहुल गांधी पूछ रहे हैं कांग्रेस की हार की वजह
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नई दिल्ली।लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस की दुर्दशा के बाद आखिरकार राहुल गांधी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में राहुल गांधी ने वरिष्ठ नेताओं से कांग्रेस की हार की वजह पूछी उन्होंने पूछा कि कैसे एक बार फिर से कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से खड़ा किया जा सके। राहुल गांधी पूछ रहे हैं कांग्रेस की हार की वजह. सूत्रों की माने तो कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी, मणिशंकर अय्यर और जयपाल रेड्डी के साथ गुरुवार को तकरीबन चार घंटे तक बैठक की। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ...
चुनावो में हार से नाखुश राहुल ने सलाहकारों से मांगा जवाबPalpalindia
सलाहकारों से पूछा राहुल ने, हम हारे क्यों, मिले दिलचस्प जवाबपंजाब केसरी
राहुल ने सलाहकारों से पूछा हम हारे क्यों, मिले कई जवाबनवभारत टाइम्स
khaskhabar.com हिन्दी -एनडीटीवी खबर
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दैनिक जागरण

दिल्ली में अल्पमत सरकार का भी विकल्‍प
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गूगल डूडल मना रहा है पोलियो दवा के खोजकर्ता डॉ. जोनास सॉल्क का 100वां जन्मदिन · आइडिये का आगाज · जॉब्स एलर्ट · इन महंगे स्मार्टफोन्स ने मचाई धूम · 8 गैजेट्स जो केवल लखपति ही खरीदने की सोच सकते · ऐरोमोबिल ने बनाई हवा में उड़ने वाली कार, देखें तस्‍वीरें · गैलरी · तस्वीरें · समाचार · मनोरंजन · क्रिकेट · कार्टून · ई-कार्ड्स · सुविचार · फोटो गैलरी · समाचार · क्रिकेट · मनोरंजन · अध्यात्म · टेक्नोलॉजी · वीडियो · न्यूज़ रील · मनोरंजन · अध्यात्म · स्वास्थ्य · पर्यटन · राशिफल · हास्य · स्वास्थ्य · bolindiabol. जुड़े जागरण से और दें अपनी सोच को एक नया मुक़ाम. गैंग्स · सिटिज़न जर्नलिस्ट्स · जोकस्टर्स ...
'आप' को SC से झटका, एलजी को सराहाShri News
बाहर से समर्थन पर दिल्ली में अल्पमत सरकार संभव : कोर्टLive हिन्दुस्तान
लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग से सुप्रीम कोर्ट संतुष्टनवभारत टाइम्स
आज तक -Nai Dunia -Inext Live
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Live हिन्दुस्तान

योगी आदित्य नाथ ने दी उमा भारती को चुनौती
Live हिन्दुस्तान
गंगा में अस्थियों के प्रवाह पर प्रतिबंध लगाए जाने के निर्णय सम्बन्धित बयान से गोरक्ष पीठाधीश्वर व भाजपा सांसद योगी आदित्य नाथ बेहद क्षुब्ध हैं। उन्होंने गुरुवार को अपनी ही केन्द्र सरकार की जल संसाधन मंत्री उमा भारती को चुनौती दी कि निर्मल गंगा अभियान की सफलता सुनिश्चित कराने के लिए पहले औद्योगिक कचरे के साथ सीवर व ड्रेनेज को नदियों में गिरने से रोकें। उन्होंने कहा कि हिन्दू भावनाओं पर आघात करना सभी के लिए आसान हो गया है। पहले दुर्गा पूजा की प्रतिमाओं को नदियों में प्रवाहित करने पर रोक की बात हुई और अब गंगा में अस्थियों के प्रवाह को रोकने की बात हो रही है।
पूर्वाचल की हर नदियों की सफाई जरूरी : आदित्यनाथदैनिक जागरण

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एनडीटीवी खबर

गोहाना बैंक लूट : तीन आरोपी गिरफ्तार, मकान मालिक ने की आत्महत्या
एनडीटीवी खबर
गोहाना: देशभर में लोगों को चौंकाने वाले हरियाणा के गोहाना में सुरंग के जरिये बैंक लूट मामले में एक आरोपी ने खुदकुशी कर जान दे दी है। इसके अलावा इस महाचोरी के तीन और आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं। इनके पास से तकरीबन 40 किलो से ज्यादा के गहने बरामद किए जा चुके हैं। दिलचस्प बात है कि जिस वीरान मकान में सुरंग खोदने की शुरुआत हुई, उसका मकान मालिक ही इस महाचोरी का मास्टरमाइंड बताया गया है। पुलिस के अनुसार, गोहाना में उसके घर के जरिए 125 फुट लंबी सुरंग पंजाब नेशनल बैंक के लॉकर तक खोदी गई थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में जगदीश का पुत्र सुरेंद्र, धरमपाल का पुत्र बलराज ...
सुरंग बनाकर बैंक साफ करने वाले चोर पकड़े गएनवभारत टाइम्स
प्रॉपर्टी डीलर निकला सुरंग खोद बैंक डकैती का मास्‍टरमाइंड, 39 किलो गहने बरामददैनिक भास्कर
सुरंग से करोड़ों में सेंध, केस खुलते ही 5 खुलासेअमर उजाला
पंजाब केसरी -Zee News हिन्दी -Patrika
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नवभारत टाइम्स

खाताधारकों के नाम देने से सरकार के सामने नया संकट
नवभारत टाइम्स
क्या भारत सरकार किसी बात को गुप्त रख सकती है? उसकी इसी योग्यता पर अमेरिका से साथ एक महत्वपूर्ण समझौते का भविष्य जुड़ा है, जिस पर साल खत्म होने से पहले साइन होने हैं। अगर भारत अमेरिका के साथ बैंक अकाउंट्स की इंफर्मेशन शेयर करने पर समझौता नहीं कर पाता है तो प्राइवेट कैपिटल फ्लो पर न सिर्फ अधिक विदहोल्डिंग टैक्स लगेगा बल्कि आरबीआई को अमेरिकी बॉन्ड से जो ब्याज मिलता है, उस पर भी अधिक टैक्स चुकाना पड़ सकता है। इससे सरकारी खजाने पर नेगेटिव असर होगा। यह सवाल ब्लैक मनी मामले में सरकार के 627 विदेशी खाताधारकों के नाम सुप्रीम कोर्ट को देने से खड़ा हुआ है। ये नाम भारत को ...

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Nai Dunia

स्विट्जरलैंड ने काले धन पर दिलाई संधि की याद
नवभारत टाइम्स
स्विस बैंकों में ब्लैक मनी अकाउंट होल्डर्स की जानकारी देने के मामले में 'संधि' ने पेंच फंसा दिया है। स्विट्जरलैंड का कहना है कि भारत के साथ 'कर संधि' के तहत दी गई सूचना को 'सिद्धांततः' किसी 'विशिष्ट और सम्बद्ध' मामले में कार्यवाही को छोड़कर किसी अन्य अदालत या निकाय के समक्ष सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। स्विट्जरलैंड की तरफ से स्पष्टीकरण सरकार द्वारा HSBC बैंक, जिनीवा में 627 खाताधारकों के नाम सुप्रीम कोर्ट को दिए जाने के बाद आया है। स्विस वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों के बीच डबल टैक्स अग्रीमेंट अंतरराष्ट्रीय मानकों पर है और सरकारों के ...
खाताधारकों की जानकारी देने में फंसा पेचआज तक
काला धन : स्विट्जरलैंड ने पेच फंसायाSahara Samay
भारत को गोपनीय रखनी होगी हासिल सूचनादैनिक जागरण

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फेस टु फेस

लोकसभा जितने के बाद : मोदी

जानिये जनता की समस्या : इनकी जुबानी

RavindraNathPrajapati
RGGVY Yojana me BPL Pariwaro ko chhor anya pariwaro ko labhanwit kiya gaya hai. Iss aniymitata ke khilaph adhishasi abhiyanta aur m.d. se shikayat karne ke bad bhi sunvayi nahi hui hai. BPL pariwar ke log upekshit ho gaye hai. Aash bhari nigah se dekआगे पढें...

Abusahma
Humare yahan safai ki vyawastha kafi kharab hai niyukti ke baad aaj tak kabhi safai karmchari dikhai nahi diya.dr.Abusahma kabulpur jaunpurआगे पढें...

ANKIT SINGH YADAV
नौपेडवा से बटाऊबीर मार्ग सन् 2012 मे प्रधानमँत्री ग्रामीण सडक योजना के अँतर्गत बनकर तैयार हुआ था जबकि सडक बने 1 साल हुए है मगर सडक को देखकर कोई भी यह नही कहेगा कि ये एक साल की बनी है बल्कि ये कहेगा कि यह 5 से8 साल पहले कि है पर जनता बेवकूफ है जो इस एआगे पढें...

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भारत का प्रधान मंत्री कौन है ?

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